गुरूजी – नव संवत्सर

Guru Ji - Nav Samvatsar

भारतीय नव वर्ष सम्वत् 2078 वर्षफल (सन् 2021 अप्रैल से मार्च 2022) लोकेन्द्र चतुर्वेदी भारतीय नव वर्ष सम्वत् 2078, 13 अप्रैल सन् 2021 दिन मंगलवार से प्रारंभ हो जाएगा। इस नव सम्वत्सर के राजा मंगल होंगे। इस सम्वत्सर का शुभारंभ मंगलवार को होने के कारण मंगल राजा के पद को धारण करेंगे। इस नव सम्वत्सर का नाम आनंद होगा। मंगल का शासन पूरे विश्व पर पूरे सम्वत्सर अर्थात वर्ष भर रहेगा। इस सम्वत्सर में शास्त्रानुसार सभी फसलें नष्ट होती रहती हैं। सभी अन्न महंगे, घी, तेल महंगे, जन सामान्य में साधारण प्रसन्नता का वातावरण रहता है। वर्ष के प्रारम्भ में 3 मई से मंगल नीच राशि कर्क में प्रवेश करेंगे, जिससे भीषण गर्मी बढ़ेगी। अग्निकाण्ड की अनेक घटनाएं घटेंगी। जिससे जन-धन की हानि सम्भव होगी। देश के किसी प्रान्त में राजनैतिक अस्थिरता तथा सत्ता परिवर्तन के योग बनेंगे। विशेष प्रकार का ज्वर प्रकोप पैदा होगा। जन-धन की हानि होगी। समाज में लुटेरे एवं चोरों से जनता त्रस्त रहेगी। इस सम्वत्सर में मेष संक्रांति मंगलवार को पड़ रही है, अतः मंगल पुनः इस सम्वत्सर में मंत्री पद पर सुशोभित होंगे। राजा मंगल के मंत्रिमंडल में कुल 10 विभाग होंगे। यथा राजा, मंत्री, सस्येश, दुर्गेश, धनेश, रसेश, धान्येश, नीरसेश, फलेश व मेधेश, इन्हीं दस विभागों द्वारा इस भारत देश एवं विश्व में होने वाली घटनाओं का सूत्रपात होगा। संवत्सरीय ग्रह सभासदों के दस विभागों में से चार विभाग अकेले मंगल के पास हैं। जिसके परिणामस्वरूप देश एवं जनता को अनेक प्राकृतिक विपरीतता का सामना करना पड़ेगा। ‘आनन्द’ नामक सम्वत्सर में शास्त्रानुसार सभी फसलंे नष्ट होंगी। सभी अन्न महंगे होंगे। महंगाई बढ़ेगी, घी, तेल के दाम बढ़ेंगे। प्रायः वस्तुओं का मूल्य बढ़ने के योग बनेंगे। समाज में चोरों का उत्पात बढ़ेगा। चोर आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके जनता का धन हरण करने वाले होंगे। ठगी का वर्चस्व बढ़ेगा। रोजगार का नाश होगा। इस वर्ष धन के कारक बृहस्पति वक्री होते हुए 14 सितंबर को मकर राशि में प्रवेश करके नीचता को प्राप्त होंगे। जिसके फलस्वरूप भारत तथा पूरे विश्व में अर्थव्यवस्था चरमराएगी। आर्थिक मंदी का दौर चलेगा। रोजगार का नाश होगा। प्राकृतिक प्रकोप से आर्थिक हानि के योग बनेंगे। शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव चलते रहेंगे। प्रायः गिरावट के योग बनेंगे। गुरु 17 अक्टूबर से मार्गी होते हुए 22 नवम्बर में पुनः कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे साधारण रूप से आर्थिक पक्ष में सुधार प्रारम्भ होगा। देश के प्रसिद्ध राजनेताओं को आयु का संकट पैदा होगा। किसी राजनेता को यात्रा के दौरान क्षति या आयु पर संकट सम्भव होगा, अन्यथा दुर्घटना के योग भी सम्भव होंगे। देश को इस वर्ष तकनीकी क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त होगी। भारत देश को इस वर्ष सैन्य शक्ति को मजबूत करने तथा सैन्य शक्ति का विस्तार करने की बड़ी उपलब्धि प्राप्त होगी। वर्षा की दृष्टि से यह सम्वत्सर शुभ नहीं है। सूखा पड़ने के योग बनेंगे तथा समुद्र तटीय क्षेत्रों में व्यापक वर्षा बाढ़ की स्थिति से खेती को व्यापक क्षति पहुंचेगी। खड़ी फसल में अनेक प्रकार के रोग भी लग जाएंगे। कीट, पतंगो, टिड्डी इत्यादि के हमलों से भी फसलों को क्षति पहुंचेगी। मई-जून में विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक प्रकोप आंधी, तूफान, बिजली गिरने से जन-धन की हानि होगी। सितम्बर से नवंबर के मध्य में जनता में रोग का प्रकोप, हिंसा, समुद्र तटीय क्षेत्रों में तूफान प्राकृतिक उत्पात से जन-धन की क्षति होगी। भारत के पूर्वी सीमा व पूर्वी देशों में अशांति के योग बनेंगे। जनवरी 2022 से मार्च 2022 तक कई विपरीत परिस्थितियों का सामना देश को करना पड़ेगा। भूकम्प, प्राकृतिक प्रकोप, बर्फबारी, भीषण समुद्री तूफान, विस्फोटक दुर्घटनाएं घटकर जन-धन की व्यापक क्षति करेंगी। किसी राजनेता के प्राण संकट के योग बनेंगे अथवा राजनेता का शोक सम्भव होगा। पर्वतीय प्रदेशों में हिमपात, हिम-स्खलन, वर्षा आदि प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की क्षति होगी। देश के सेनानायक, रक्षा विभागों के उच्चाधिकारी या रक्षामंत्री को विशेष कष्ट के योग बनेंगे।इस सम्वत्सर में जनता को चोरों, ठगों, लुटेरों व रोगों से विशेष पीड़ा प्राप्त होगी। गायों में अल्प दूध बनेगा तथा विप्र लोग अपने कर्म में नित्य लगे रहेंगे। सामान्यतः अशांति का माहौल बना रहेगा। इस वर्ष दुर्गेश का पद मंगल को प्राप्त होने से जनता स्वजनों के वियोग से दुखी होगी। व्यापारियों को विशेष भय प्राप्त होगा तथा शासक वर्ग द्वारा जनता में दण्ड का भय बना रहेगा। शुक्र के धनेश होने के फलस्वरूप धनी लोगों, बड़े उद्योगपतियों का धन और बढ़ेगा। व्यापारी वर्ग में मध्यम सुख बनेगा और शासक जन-जनता के पालन में तत्पर रहेंगे। सूर्य के रसेश पद के परिणामस्वरूप जनता के भौतिक सुखों में कमी, वर्षा की कमी, लोगों में दिखाने के लिए फैशन पर खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। शासक वर्ग भोग विलास में रत रहेंगे। सम्वत्सर राजा मंगल होने से इस वर्ष मौसम में भारी फेर बदल होंगे, तीव्र हवाएं चलेंगी। देश के विभिन्न भागों में आंधी तूफान के योग बनेंगे। इस वर्ष भीषण गर्मी बढ़ेगी एवं अग्निभय पैदा होगा। वाहनों, जंगलों एवं मनुष्यों को भीषण अग्निकांड से हानि प्राप्त होगी। बिजली के उपकरणों द्वारा स्वतः आग से जल जाने का भय बनेगा। वाहनों में स्वतः आग लग जाने का भय बनेगा। वायुसेना की दुर्घटनाएं सम्भावित होंगी। समाज में चोरों, लुटेरों का आतंक बढ़ेगा। लोग धन के हरण में हिंसा का सहारा लेंगे। विस्फोटक पदार्थों से जन-धन की हानि सम्भव होगी। वर्षा के मौसम में खूब घटनाएं होने पर भी कम वर्षा होगी। जनता में शासक वर्ग के प्रति रोष बढ़ेगा, हिंसा, आंदोलन एवं प्राकृतिक उत्पातों के कारण वस्तुओं के उत्पादन में गिरावट होगी, पशुधन की हानि होगी। शासक वर्ग की कर्तव्यपालन में उदासीनता दिखाई देगी। हिंसा दंगों से रक्तपात एवं दुर्घटनाओं की बहुलता रहेगी। समाज में पित्तजनित रोगों की प्रबलता, त्वचा विकार, ज्वर की बुलता रहेगी। बालक तथा बालिकाओं के प्रति क्रूरता बढ़ेगी। सर्पादि विषैले जन्तुओं से जन-धन की हानि सम्भव होगी। राजा या राजातुल्य व्यक्तियों के मध्य विग्रह युद्ध आरोप-प्रत्यारोप की भरमार रहेगी। सत्ताधारी तथा सत्ता विपक्ष के मध्य युद्ध जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होंगी। वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, इंजीनियर, भूमि बिलिं्डग कार्य से सम्बन्धित लोग, शिल्पकार, अग्नि से सम्बन्धित कार्य करने वाले, धातु व्यवसायी, वकील, पुलिस, सेना, स्टंटमैन, ब्यूटी पार्लर, सेवक, गाडर््स, चैकीदार, बीमा कम्पनी, चिकित्सालय, बाहुबली, चोरों, ठगों एवं लुटेरों को बढ़ावा देने वाला यह सम्वत्सर होगा। औषधियों के व्यापार में वृद्धि होगी। चिकित्सालयों का निर्माण होगा। स्वास्थ्यवर्धक दवाइयों का प्रचार-प्रसार होगा। सरकार द्वारा सेवक, निम्नवर्ग के लाभ हेतु विभिन्न योजनाओं का प्रारम्भ होगा। शासक दूर-दृष्टि व परिणाम का आकलन किए बिना ही मनभावन घोषणाएं करेंगे। शासक वर्ग द्वारा कर में वृद्धि करने के योग बनेंगे। टैक्स बढ़ेगा। शेयर, सट्टा के धंधे में बड़े-बड़े लोगों का दिवाला निकल जाएगा। देश के बैंकों की स्थिति अच्छी नहीं रहेगी। शेयर बाज़ार में काफी उथल-पुथल बनी रहेगी। देश में किसी बड़े उद्योगपति की हानि या शोक सम्भव होगा। देश का खर्च बहुत बढ़ा रहेगा। धर्मार्थ संस्थाओं का निर्माण होगा। सोना, मोती, पीली धातु व पीले पदार्थ, वस्त्र, कपूर, सुगंधित वस्तु इत्र का भाव महंगा होगा। फलेश चंद्रमा के परिणामस्वरूप वक्षों में अधिक फल-फूल होंगे। विप्रलोग उत्तम भोग पदार्थों का उपभोग करेंगे तथा राजा लोग शासन व्यवस्था पर ध्यान देंगे।इस वर्ष मंगल राजा होने से समय का वाहन ‘नौका’ है, जिसके परिणामस्वरूप जनता भ्रमित, चैपायों को पीड़ा प्राप्त होगी। सर्वत्र उत्पादन में कमी रहेगी, लोगों का इधर-उधर पलायन बना रहेगा, सर्वत्र दुष्टों व आतंकियों का भय बना रहेगा। इस वर्ष सम्वत्सर का निवास ‘माली’ के गृह में होने से उपभोक्ता वस्तुएं सुलभ रहेंगी।

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