श्री राधामाधव युगल भगवान- सहस्त्रार्चन पूजा

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भगवान श्री राधामाधव के एक हजार नाम से ‘तुलसी पत्र’ अर्पण किया जाता है। एक हजार तुलसी पत्र श्री राधामाधव को चढ़ाया जाता है एवं धूपदीप, नैवेद्य, ताम्बूल, नारियल से पूजा की जाती है। शनिवार को इस पूजा का विशेष फल होता है।

भगवान श्री राधामाधव भगवान के एक हजार नाम से ‘तुलसी पत्र’ अर्पण किया जाता है एवं प्रसाद रूप में तुलसी पत्र को ग्रहण करने से अनन्त पुण्य प्राप्त होता है। जो मानव लक्ष्मी की कृपाप्रसाद की इच्छा करता है, भूमि,  भवन, वाहनादि भौतिक सुख सम्पदा की प्राप्ति की इच्छा करता है तथा जो कन्या विवाह सुख प्राप्त करना चाहती है, जिसे सन्तान सुख की कामना हो, उसे भगवान श्री राधामाधव की सहस्रार्चन पूजा प्रत्येक माह के शनिवार को एक वर्ष तक करने से मनोकामना पूर्ण होती है। यदि कोई मानव महामारी, पितृ दोष, सर्पादि विषैले जन्तुओं से, दरिद्रता से ग्रसित हो तो इस पूजा से एक वर्ष में सभी उपद्रवों से मुक्ति मिलती है। भक्ति प्राप्त करने वालों के लिए तो यह पूजा अमृत के समान है इस सहस्रार्चन के प्रभाव से श्रीराधा कृष्ण में भक्ति रूपी फल प्राप्त होता है।

पूजन सामग्री सहित दक्षिणा-रु. 1100