श्री सिद्धिदात्री दुर्गा-सहस्त्रार्चन पूजा

श्री सिद्धिदात्री दुर्गा

श्री सिद्धिदात्री दुर्गा जी के एक हजार नाम से लाल रंग के पुष्प अर्पण किया जाता है। एक हजार लाल रंग के पुष्प श्री सिद्धिदात्री दुर्गा जी को चढ़ाया जाता है एवं धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, नारियल से पूजा की जाती है। मंगलवार एवं शनिवार को इस पूजा का विशेष फल होता हैं

श्री सिद्धिदात्री दुर्गा जी के एक हजार नाम से लाल रंग के पुष्प यथा – गुड़हल, कनेर, गुलाब को अर्पण कर विशेष पूजा की जाती है। इस पूजा से देवी की प्रसन्नता प्राप्त होती है एवं अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। जो मानव भयंकर शत्रुपीड़ा से ग्रसित हो, भूत प्रेत भय से ग्रसित हो, बुद्धि कुंण्ठित रहती हो, रोग से बारम्बार पीड़ा प्राप्त होती हो, जीवन में मारक ग्रह की पीड़ा हो, राहू, केतु या शनि की महादशा चलती हो, उसकी पीड़ा से ग्रसित हो, बारम्बार ज्वर की पीड़ा से ग्रसित हो, दुर्घटना की पीड़ा से ग्रसित हो, जेल, कारागार बन्धन के भय से ग्रसित हो, शत्रु द्वारा अभिचार से ग्रसित हो, सन्तान सुख की कामना हो, पुरुष को विवाह में बाधा हो, स्त्री को विवाह में बाधा हो, अग्नि, लौह धातु एवं सरकार द्वारा पीड़ा से ग्रसित होने पर श्री सिद्धिदात्री दुर्गा जी के सहस्रार्चन पूजा प्रत्येक माह के मंगलवार एवं शनिवार को एक वर्ष करने से समस्त मनोकामना की पूर्ति होती हैं समस्त उपद्रव, दुःस्वप्न, शत्रु पीड़ा एवं समस्त ग्रहपीड़ा व भय का नाश होता है एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। मंगलवार एवं शनिवार को मांस, मंदिरा का त्याग करना चाहिए। इससे शुभफल की प्राप्ति होती है।

पूजन सामग्री सहित दक्षिणा-रु. 1100