श्री सिद्धि विनायक गणेश की महिमा

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मंदिर में भी श्री राधामाधव युगल भगवान के गर्भगृह से अग्निकोण में श्री सिद्धि विनायक प्रतिष्ठित है। यह चार भुजाओं से युक्त है। तथा इनकी सूढ के बाएं हाथ की तरफ मोदक को ग्रहण किये हुए हैं। यह कमल पर विराजमान हैं तथा इनका वाहन मूशक भी इनके मंगल चरणों में विद्यमान है। श्री गणेश के ऐसे विग्रह स्वरूप का दर्शन एवं पूजन करने से समस्त अमंगलों का नाश होता है एवं नारियल का भोग प्रदान करने पर विघ्न का नाश होता है एवं मनोभिलाषा पूर्ण होती है। किसी भी प्रकार के विशेष कार्य की सिद्धि के लिए श्री सिद्धि विनायक का दर्शन पूजन, दीपदान करना मंगल प्रदान करता है। समस्त विघ्नों का नाश करके कार्य में सफलता प्रदान करता है एवं एक वर्ष तक हर मास में चतुर्थी तिथि पर एक हजार आठ नामों से दूब अर्पण करने पर मनोकामना सिद्ध होती है।