गुरूजी – वैशाख मास

Guru Ji- Vaishakh Mass1

वैशाख मास महिमा लोकेन्द्र चतुर्वेदी भारतीय सनातन धर्मानुसार सभी मासों का किसी न किसी प्रकार से उनकी महिमा का वर्णन किया गया है।

सभी मास कुछ विशेष कृत्यों के द्वारा परम पुण्य फल प्राप्त करने वाले होते हैं। इसी प्रकार सभी मासों में वैशाख के समान कोई मास नहीं है। वैशाख मास अपने श्रेष्ठ कारणों से उत्तम मास है। वैशाख मास को शास्त्रानुसार ब्रम्हा जी ने सब मासों में उत्तम सिद्ध किया है। यह मास माता की भांति सब जीवों को सदा अभीष्ट वस्तु प्रदान करने वाला है। धर्म, यज्ञ, क्रिया और तपस्या का सार है। सम्पूर्ण देवताओं द्वारा पूजित है। जैसे विद्याओं में वेद विद्या, मंत्रों में प्रणव, वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु, देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राम्हण, प्रिय वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगा जी, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शस्त्रों में चक्र, धातुओं में सुवर्ण, वैष्णवों में शिव तथा रत्नों में कौस्तुभमणि उत्तम है, उसी प्रकार धर्म के साधनभूत महीनों में वैशाख मास सबसे उत्तम है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला इसके समान दूसरा कोई मास नहीं है। जो वैशाख मास में सूर्योदय से पहले स्नान करता है, उससे भगवान विष्णु निरंतर प्रीति करते हैं। पाप तभी तक गरजते हैं, जब तक जीव वैशाख मास में प्रातः काल जल में स्नान नहीं करता। वैशाख के महीने में सब तीर्थ, देवता तीर्थ के अतिरिक्त बाहर के जल में भी सदैव स्थिर रहते हैं। भगवान विष्णु की आज्ञा से मनुष्यों का कल्याण करने के लिए वे सूर्योदय से लेकर एक घंटे के भीतर वहां उपस्थित रहते हैं। वैशाख मास सर्वश्रेष्ठ मास है और शेषशाची भगवान विष्णु को सदा प्रिय है।

सब दानों से जो पुण्य होता है और सब तीर्थों में जो फल होता है, उसी को मनुष्य वैशाख मास में केवल जलदान करके प्राप्त कर लेता है। जो जलदान में असमर्थ है, ऐसे ऐश्वर्य की अभिलाषा रखने वाले पुरुष को उचित है कि वह दूसरे को जागरुक करे, दूसरे को जलदान की महिमा समझाए। यह सब दानों से बढ़ कर हितकारी है। जो मनुष्य वैशाख मास में मार्ग पर यात्रियों के लिए प्याऊ लगाता है, वह विष्णुलोक में प्रतिष्ठित होता है। प्याऊ देवताओं, पितरों तथा ऋषियों को अत्यंत प्रीति देने वाला है। जिसने प्याऊ लगवाकर रास्ते के थके-मांदे मनुष्यों को संतुष्ट किया है, उसने ब्रम्हा, विष्णु और शिव आदि देवताओं को संतुष्ट कर लिया है। वैशाख मास में जल की इच्छा रखने वाले को जल, छाया चाहने वाले को छाया और पंखे की इच्छा रखने वाले को पंखा दान करना चाहिए। जो प्यास से पीड़ित महात्मा पुरूष के लिए शीतल जल प्रदान करता है, वह उतने ही मात्र से दस हजार राजसूय यज्ञों का पुण्य फल पाता है। धूप और परिश्रम से पीड़ित मनुष्यों के लिए ब्राम्हण के लिए जो पंखा डुलाकर हवा करता है, वह उतने से ही मुक्त हो भगवान विष्णु सायुज्य प्राप्त कर लेता है। जो शुद्ध चित से ताड़ का पंखा देता है, वह सब पापों का नाश करके ब्रम्हलोक को जाता है। जो विष्णुप्रिय वैशाख मास में पादुका (चप्पल, जूता) दान करता है, वह यमदूतों का तिरस्कार करके विष्णुलोक में जाता है। जो मार्ग में अनाथों के ठहरने के लिए विश्रामशाला बनवाता है, उसके पुण्य फल का वर्णन नहीं किया जा सकता है। मध्यान्ह में आए हुए अतिथि, ब्राम्हण, भूखे को यदि कोई भोजन दे तो उसका फल अनन्त होता है।

स्कन्द पुराण के अनुसार, वैशाख मास व्रत में तेल लगाना, दिन में सोना, कांसे में भोजन करना, पलंग पर सोना निषिद्ध पदार्थ खाना, मद्य-मांस व्यसनादि करना, बार-बार भोजन करना तथा रात में खाना त्याग देना चाहिए। जो वैशाख में व्रत का पालन करने वाला मनुष्य कमल के पत्ते पर भोजन करता है, वह सब पापों से मुक्त हो विष्णुलोक में जाता है। जो विष्णु भक्त पुरुष वैशाख मास में नदी में स्नान करता है, वह तीन जन्मों के पापों से निश्चय ही मुक्त हो जाता है। जो सूर्योदय के समय किसी समुद्रगामिनी नदी में वैशाख स्नान करता है, वह सात जन्मों के पापों से तत्काल छूट जाता है। सूर्यदेव के मेष राशि में आने पर भगवान विष्णु के उद्देश्य से वैशाख मास स्नान का व्रत लेना चाहिए। स्नान के उपरांत भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। वैशाख मास के देवता मधुसूदन भगवान हैं। उनसे इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए-

“हे मधुसूदन! हे देवेश्वर माधव! मैं मेष राशि में सूर्य के स्थित होने पर वैशाख मास में प्रातः स्नान करुंगा, आप इसे विधि-विधान पूर्ण कीजिए।” इस प्रकार प्रार्थना कर व्रत धारण करना चाहिए। मात्र वैशाख मास के व्रत व दान करके मनुष्य अक्षय पुष्प को प्राप्त करता है।

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